सोमवार 5 अक्टूबर 2026 - 16:21
नेमतों का गलत इस्तेमाल इंसान को विभिन्न अज़ाब में डाल देता है: सर्वोच्च नेता

तेहरान: इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा ख़ामेनेई ने कहा कि अज़ाब केवल जहन्नम की आग तक सीमित नहीं है, बल्कि अल्लाह की नेमतों का गलत इस्तेमाल इंसान को आख़िरत में हसरत, ज़िल्लत, मलामत और ख़ौफ़ जैसे विभिन्न अज़ाबों में भी मुब्तला कर सकता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा ख़ामेनेई ने एक संबोधन में अल्लाह की नेमतों के सही इस्तेमाल और गलत रवैये के परिणामों को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब इंसान को मिली हुई नेमतों से सही तरीके से लाभ उठाना चाहिए था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, तो उसे अपने कर्मों का परिणाम भुगतना होगा।

उन्होंने सूरह अल-अहक़ाफ़ की आयत «أَذْهَبْتُمْ طَیِّبَاتِکُمْ فِی حَیَاتِکُمُ الدُّنْیَا» का उल्लेख करते हुए कहा कि इंसान दुनिया में मिलने वाली नेमतों का इस्तेमाल किस उद्देश्य और किस रास्ते में करता है, इसका हिसाब आख़िरत में लिया जाएगा। अल्लाह तआला ने ऐसे लोगों के लिए «عَذَابَ الْهُونِ» यानी अपमान और ज़िल्लत के अज़ाब का उल्लेख किया है।

आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनेई ने कहा कि अज़ाब केवल आग की शक्ल में नहीं होता, बल्कि उसकी विभिन्न रूप होते हैं। आख़िरत में हसरत भी एक बड़ा अज़ाब है, क्योंकि उस समय इंसान अपने किए हुए कर्मों पर ऐसी हसरत में मुब्तला होगा, जिसका अंत नहीं होगा।

उन्होंने आगे कहा कि मलामत और शमातत भी अज़ाब का एक रूप है। सूरह अद-दुख़ान में «ذُقْ إِنَّکَ أَنتَ الْعَزِیزُ الْکَرِیمُ» के माध्यम से इसी प्रकार की मलामत की ओर संकेत किया गया है, जहां इंसान को उसके दुनिया में किए गए दावों के आधार पर ताना और मलामत सहनी पड़ेगी।

उन्होंने ख़ौफ़ को भी आख़िरत के अज़ाब का एक रूप बताते हुए कहा कि दुनिया में इंसान के सामने हमेशा किसी न किसी उम्मीद की गुंजाइश रहती है, लेकिन आख़िरत में अज़ाब से निजात की कोई राह बाकी नहीं रहेगी।

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